सोमवार, 16 मार्च 2026
Hormuz Strait News: ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध लंबा खिंचते हुए दिख रहा है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान किया है, जिससे भारत की तेल और गैस आपूर्ति पर क्या असर होगा, आइए जानते हैं...
नई दिल्ली:
अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग लंबी खिंचने के आसार दिख रहे हैं. भले ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत देश के कई शीर्ष नेता हमले में मारे गए हों, लेकिन ईरान की सरकार और सशस्त्र बल ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) मोर्चा संभाले हुए है. जबकि अमेरिका-इजरायल ईरान में सत्ता परिवर्तन की मुहिम में जुटे हैं. ईरान ने कच्चे तेल के व्यापार के अहम रूट होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान किया है. अरब मुल्कों के साथ भारत के तेल-गैस व्यापार का ये अहम गलियारा है, जहां से 20 फीसदी कच्चे तेल की आपूर्ति होती है. ईरान ही नहीं, सऊदी अरब, यूएई से लेकर कतर-कुवैत जैसे देशों से भारत को तेल-गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि भारत ने किसी भी युद्ध या वैश्विक संकट (जैसे ईरान-इजरायल तनाव) से निपटने के लिए भूमिगत भंडारों में तेल जमा कर रखा है. यह मुख्यतया तीन शहरों विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में है. इनमें लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल जमा करने की क्षमता है. ये 10 दिन की जरूरत पूरा करता है.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी में कहा था कि अगर हम अपने रणनीतिक भंडार, रिफाइनरी स्टॉक और बंदरगाहों पर मौजूद कच्चे तेल को मिला दें भारत के पास कुल 74 दिनों का बैकअप उपलब्ध है. भारत मिशन समुद्र मंथन के जरिये इसे 90 दिनों तक ले जाने पर काम कर रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज के समुद्री गलियारे से रोजाना 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती है.कुछ समुद्री गलियारे में पाइपलाइन के जरिये भी आपूर्ति होती है. लेकिन गलियारा बंद होने से रोजाना 1 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही बंद हो जाएगी, जो कुल तेल व्यापार का करीब 10 फीसदी है.
भारत के कच्चे तेल के आयात का 50 फीसदी यानी करीब 25 से 27 लाख बैरल प्रति दिन होर्मुज स्ट्रेट से होता है. इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से मुख्यतया कच्चा तेल आता है. तेल के अलावा घरेलू गैस सिलेंडरों वाली एलपीजी गैस और एलएनजी इसी रूट से आती है, खासकर कतर से. एनर्जी मार्केट एनालिसिस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार है. इसमें रिफाइनरी स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और देश की ओर आ रहे जहाजों का तेल शामिल है.
भारत रोजाना औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है. इसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल रोजाना होर्मुज रूट से आता है. अगर मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति रुकती है तो तत्काल असर सप्लाई और कीमतों पर पड़ेगा. रिफाइनरी भी भंडार रखती हैं.लंबे समय तक रोड़ा आया तो तेल आयात की लागत, ढुलाई लागत और वैकल्पिक रूट के कारण दबाव बढ़ेगा. कच्चे तेल के ब्रेंट क्रूड का दाम 80 डॉलर प्रति बैरल पार है, जो ईरान संकट के पहले से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है.
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में कच्चा तेल आयात करने में 137 अरब डॉलर खर्च किए थे. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी में ही 20.63 करोड़ टन कच्चा तेल आयात पर 100 अरब डॉलर खर्च हुआ है. होर्मुज जलडमरूमध्य का 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल निर्यात का लगभग 33 फीसदी और गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत यहीं से गुजरता है.
भारत की रिफायनरियों के पास करीब 10 दिन का कच्चे तेल का भंडार है. इसके साथ करीब एक हफ्ते का फ्यूल स्टॉक है. लिहाजा अगर ईरान-इजरायल युद्ध से थोड़े समय तक आपूर्ति प्रभावित रहती है तो भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जरूरतें पूरी कर सकता है. वहीं होर्मुज के अलावा अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों का रुख कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के तमाम जहाजों की हिंद महासागर और अरब सागर क्षेत्र में मौजूदगी भी है. भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी क्रूड की मांग कम होने के बाद ये स्थिति बनी है.
प्राकृतिक गैस का बड़ा संकट
केपलर के एक्सपर्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए कच्चे तेल के मुकाबले प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बड़ा संकट है. भारत अपनी जरूरत की 80-85 फीसदी एलपीजी आयात करता है, जिसमें ज्यादातर खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिये आता है. कच्चे तेल के मुकाबले एलपीजी का उतना बड़ा रणनीतिक भंडार भारत के पास नहीं है. ऐसे में गैस आपूर्ति ज्यादा जोखिम वाला मामला है.
60 फीसदी गैस का आयात
एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का भी 60 फीसदी भारतीय आयात होता है. एलएनजी और एलपीजी की तत्काल आपूर्ति का स्पॉट मार्केट भी कम है. लिहाजा होर्मुज बंद होने से गैस आपूर्ति पर संकट गहरा सकता है.
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